उत्तर प्रदेश सरकार ने RTE छात्रों के स्कूल एडमिशन में एक बड़ा बदलाव किया है। अब Aadhaar नंबर की आवश्यकता नहीं होगी। इस कदम का उद्देश्य कमजोर और वंचित परिवारों के लिए एडमिशन प्रक्रिया को सरल बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय दस्तावेज़ी जटिलताओं को कम करेगा और अधिक बच्चों को शिक्षा के मुख्यधारा में लाने में मदद करेगा।
दस्तावेज़ी जरूरतों में छूट

नई नियमावली के अनुसार, अब RTE कोटा में निजी अनएडेड स्कूलों में प्रवेश के लिए बच्चे और माता-पिता के Aadhaar कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, वित्तीय सहायता (Reimbursement) के लिए कम से कम एक माता-पिता का Aadhaar जरूरी रहेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि RTE के तहत सहायता सीधे Aadhaar लिंक बैंक खाते में ही ट्रांसफर की जाए।
आयु मानदंड और प्रवेश क्षमता
सरकार ने स्पष्ट किया कि Section 12(1)(c) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश कुल क्षमता के 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। आयु मानदंड के अनुसार, नर्सरी के लिए 3–4 साल, LKG के लिए 4–5 साल और क्लास 1 के लिए 6–7 साल के बच्चे योग्य होंगे। इससे सभी निजी स्कूलों में प्रवेश मानकीकृत होगा।
प्रवेश प्रक्रिया
दस्तावेज़ सत्यापन ब्लॉक और बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर होगा। सत्यापन के बाद स्कूल आवंटन ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम के माध्यम से दो चरणों में किया जाएगा। अंतिम चयन सूची जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमोदित की जाएगी। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस सुधार से कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले माता-पिता RTE कोटा के तहत आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
उत्तर प्रदेश ने RTE छात्रों के एडमिशन को सरल बनाकर शिक्षा की पहुंच को और व्यापक किया है, जबकि वित्तीय सहायता प्रक्रिया में जवाबदेही भी बनाए रखी है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। नियम और प्रक्रिया समय के अनुसार बदल सकती है।
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