अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत ने एक अहम लेकिन संतुलित कदम उठाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की पहल पर गठित Board of Peace की पहली आधिकारिक बैठक में भारत ने ऑब्ज़र्वर देश के तौर पर भाग लिया। यह बैठक गुरुवार को वॉशिंगटन डीसी स्थित US Institute of Peace में आयोजित हुई।
भारत का प्रतिनिधित्व भारतीय दूतावास में चार्ज द’अफेयर्स Namgya C Khampa ने किया। यह भागीदारी ऐसे समय में हुई है, जब भारत सरकार इस बोर्ड की सदस्यता के प्रस्ताव पर अभी विचार कर रही है।
Board of Peace क्या है और क्यों अहम है
Board of Peace की घोषणा पिछले महीने World Economic Forum में की गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य गाज़ा में Israel और Hamas के बीच संघर्षविराम की निगरानी और पुनर्निर्माण में भूमिका निभाना बताया गया था।

Trump हालांकि, समय के साथ इस मंच की भूमिका और महत्व बढ़ता गया है। राष्ट्रपति ट्रंप इसे एक ऐसा वैश्विक मंच मानते हैं, जिसमें “हर देश शामिल होना चाहता है” और जिसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक प्रभावशाली संस्था के रूप में देखा जा रहा है।
भारत का रुख सावधानी के साथ सहभागिता
Board of Peace में शामिल होने का निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने शुरुआत में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी थी और दावोस में हुए इसके लॉन्च से भी दूरी बनाए रखी थी।
12 फरवरी को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा था कि यह प्रस्ताव विचाराधीन है और भारत पश्चिम एशिया में शांति से जुड़ी हर पहल का समर्थन करता रहा है।
Trump उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री ने गाज़ा सहित पूरे क्षेत्र में स्थायी और दीर्घकालिक शांति की दिशा में उठाए गए प्रयासों का स्वागत किया है। ऐसे में भारत की मौजूदा मौजूदगी यह संकेत देती है कि वह बोर्ड से संवाद बनाए रखने को तैयार है, भले ही अभी पूर्ण सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला न हुआ हो।
बैठक में किन देशों ने लिया हिस्सा
Trump इस बैठक में करीब 50 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें से 27 देश बोर्ड के पूर्ण सदस्य हैं, जबकि भारत और European Union जैसे पक्ष ऑब्ज़र्वर के रूप में शामिल हुए। पूर्ण सदस्यों में अज़रबैजान, मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं।
गाज़ा के लिए अरबों डॉलर की सहायता का ऐलान
Trump बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि कज़ाख़िस्तान, अज़रबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, क़तर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत सहित नौ देशों ने गाज़ा के लिए 7 अरब डॉलर की संयुक्त राहत सहायता देने पर सहमति जताई है।
इसके अलावा, अमेरिका ने भी Board of Peace के लिए 10 अरब डॉलर की सहायता का ऐलान किया, हालांकि यह राशि किस मद में खर्च होगी, इसका विस्तृत विवरण साझा नहीं किया गया।
सुरक्षा और शांति मिशन पर चर्चा
Trump अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल के कमांडर Jasper Jeffers ने बताया कि मोरक्को, कज़ाख़िस्तान, कोसोवो और अल्बानिया ने गाज़ा में हजारों सैनिक भेजने की पेशकश की है। वहीं मिस्र और जॉर्डन ने सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग देने की बात कही है।
संयुक्त राष्ट्र पर ट्रंप का बयान
Trump इस बैठक के दौरान यह आशंका भी जताई गई कि Board of Peace को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विकल्प के तौर पर पेश किया जा सकता है। इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के साथ दोबारा मिलकर काम करेगा।

Trump उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अपार संभावनाएं हैं और अमेरिका उसे आर्थिक व संरचनात्मक रूप से मजबूत करने में मदद करेगा। ट्रंप के मुताबिक, Board of Peace भविष्य में संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर निगरानी रखने वाला मंच बन सकता है।
Board of Peace की पहली बैठक में भारत की ऑब्ज़र्वर के रूप में मौजूदगी यह दिखाती है कि नई वैश्विक पहलों पर भारत न तो जल्दबाज़ी करता है और न ही दूरी बनाकर चलता है। यह एक संतुलित कूटनीतिक कदम है, जिसमें संवाद और राष्ट्रीय हित दोनों को साथ रखा गया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत इस मंच का पूर्ण सदस्य बनता है या अपनी भूमिका सीमित रखता है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक बयानों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कूटनीतिक निर्णय समय और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी निष्कर्ष को अंतिम सरकारी रुख न माना जाए।
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