छत्तीसगढ़ में Ayushman Bharat योजना के तहत मुफ्त इलाज को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि मरीजों को सामान्य वार्ड में रखकर दस्तावेजों में ICU में भर्ती दिखाया गया, मामूली बीमारियों को गंभीर बताकर महंगे पैकेज क्लेम किए गए और इलाज से जुड़े कागजातों में हेरफेर कर सरकार से करोड़ों रुपये की मांग की गई। इस गड़बड़ी को National Health Authority के ट्रैकर सिस्टम ने पकड़ा, जिसके बाद करीब ₹280 करोड़ से अधिक के क्लेम खारिज कर दिए गए हैं।
सरकारी अस्पताल निजी से आगे, 200 करोड़ से ज्यादा के क्लेम रिजेक्ट

जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इस फर्जीवाड़े में सरकारी अस्पताल निजी अस्पतालों से भी आगे निकल गए।
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सरकारी अस्पतालों के लगभग ₹200 करोड़ के क्लेम
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निजी अस्पतालों के करीब ₹80 करोड़ के क्लेम
रिजेक्ट किए गए हैं। कुल मिलाकर दो लाख से ज्यादा मरीजों के इलाज में अनियमितता पाई गई है। इनमें करीब 26 हजार क्लेम निजी अस्पतालों से जुड़े हुए थे।
कहां-कहां सामने आई गड़बड़ी
प्रारंभिक जांच में Chhattisgarh के कई जिलों में संदिग्ध क्लेम सामने आए हैं। इनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, धमतरी, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार और बस्तर संभाग के लगभग सभी जिले शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गड़बड़ियां मुख्य रूप से:
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)
स्तर पर की गईं। कुछ मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी मरीजों पर अनावश्यक रूप से महंगे उपकरण लगाने के मामले सामने आए हैं।
कैसे खुला पूरा फर्जीवाड़ा
इस पूरे मामले का खुलासा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ट्रैकर सिस्टम से हुआ। जैसे ही किसी अस्पताल ने आयुष्मान पोर्टल पर मरीज की बीमारी, जांच रिपोर्ट और इलाज का विवरण अपलोड किया, सिस्टम ने तय प्रोटोकॉल से उसका मिलान किया।
हर बीमारी के लिए जरूरी दस्तावेज और इलाज का स्तर पहले से तय होता है। जैसे ही दस्तावेज अधूरे पाए गए या बीमारी की गंभीरता इलाज से मेल नहीं खाई, सिस्टम ने अलर्ट जारी कर दिया। इसी तकनीकी जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं।
फर्जीवाड़े के तरीके ऐसे बनाए गए क्लेम
जांच में सामने आए कुछ प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं:
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सामान्य बुखार को निमोनिया बताकर ICU में भर्ती दिखाना
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सर्दी-जुकाम के मरीजों को कई दिन भर्ती रखना
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मामूली बीमारी को गंभीर बताकर लंबा इलाज दिखाना
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हाथ-पांव दर्द को डिहाइड्रेशन बताकर पैकेज क्लेम
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डेंगू के नाम पर ICU चार्ज वसूलना
पहले भी हो चुके हैं ऐसे खुलासे
करीब एक साल पहले अभनपुर के एक सरकारी अस्पताल में सामान्य मरीजों को दो-तीन दिन तक अनावश्यक रूप से भर्ती रखने का मामला सामने आया था। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों का तबादला किया गया था। इससे पहले डेंगू इलाज में फर्जीवाड़े के आरोप में तीन निजी अस्पतालों को योजना से बाहर भी किया गया था।
डॉक्टरों के इंसेंटिव पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान इंसेंटिव सिस्टम भी सवालों के घेरे में आ गया है। धमतरी जिले में पदस्थ एक चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर का तीन साल में ₹1.40 करोड़ का इंसेंटिव बनना चौंकाने वाला माना जा रहा है। जबकि राजधानी रायपुर के बड़े सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का इंसेंटिव इससे काफी कम है। इसी वजह से राज्य सरकार ने पिछले छह महीनों से इंसेंटिव भुगतान रोक दिया है और अब डॉक्टरों के क्लेम की भी गहन जांच की जा रही है।
आगे क्या होगी कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब:
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हर जिले के संदिग्ध क्लेम का विस्तृत ऑडिट होगा
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जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी
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निलंबन, रिकवरी और आपराधिक कार्रवाई तक की संभावना है
स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. धर्मेंद्र गहवई के मुताबिक, जहां सिर्फ इंसेंटिव के लिए मरीजों को भर्ती रखा गया है, वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे। आयुष्मान भारत योजना गरीब और जरूरतमंदों के लिए शुरू की गई थी, लेकिन छत्तीसगढ़ में सामने आया यह मामला सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Disclaimer: यह लेख जांच एजेंसियों, स्वास्थ्य विभाग और उपलब्ध आधिकारिक बयानों पर आधारित है। जांच प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट आने के बाद तथ्य बदल सकते हैं। लेख का उद्देश्य केवल सूचना देना है।
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