The Kerala Story 2: हाल ही में चर्चित फिल्म The Kerala Story 2 Goes Beyond को लेकर बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर Anurag Kashyap ने खुलकर नाराज़गी जाहिर की है। केरल के कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान उनसे जब इस फिल्म पर सवाल किया गया, तो उनका जवाब काफी तीखा और साफ शब्दों में था।
“यह सिनेमा नहीं, एजेंडा है” अनुराग कश्यप

The Kerala Story 2 सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में अनुराग कश्यप फिल्म को सीधे तौर पर “प्रोपेगैंडा” बताते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में समाज को जोड़ने के बजाय लोगों के बीच नफरत और विभाजन पैदा करने का काम करती हैं। कश्यप के मुताबिक, फिल्म में दिखाए गए दृश्य और नैरेटिव किसी संवेदनशील मुद्दे को समझाने के बजाय जानबूझकर उकसाने का प्रयास करते हैं।
कंटेंट पर उठाए गंभीर सवाल
The Kerala Story 2 अनुराग कश्यप ने यह भी कहा कि फिल्म का उद्देश्य कहानी कहना नहीं, बल्कि एक खास सोच को थोपना है। उनके अनुसार, जब सिनेमा सामाजिक जिम्मेदारी भूलकर केवल विवाद और ध्रुवीकरण का माध्यम बन जाए, तो वह कला नहीं रह जाता। उन्होंने फिल्म के कुछ दृश्यों का जिक्र करते हुए इसे अतिशयोक्तिपूर्ण और भड़काऊ बताया।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
अनुराग कश्यप की इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है। एक वर्ग उनकी बातों से सहमत नजर आ रहा है और मानता है कि सिनेमा को जिम्मेदारी के साथ पेश किया जाना चाहिए। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि हर फिल्म को अपनी बात रखने का अधिकार है और दर्शक खुद फैसला करने में सक्षम हैं।
पहले भी विवादों में रही है फिल्म सीरीज़
The Kerala Story 2 गौरतलब है कि ‘द केरला स्टोरी’ फ्रेंचाइज़ पहले भी अपने विषय और प्रस्तुति को लेकर विवादों में रही है। नई कड़ी आने के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या फिल्मों को सामाजिक सच्चाई दिखाने की आज़ादी होनी चाहिए या फिर संवेदनशील मुद्दों पर संतुलन और जिम्मेदारी ज़रूरी है।
सिनेमा और समाज के रिश्ते पर फिर चर्चा

अनुराग कश्यप की टिप्पणी ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सिनेमा का रोल सिर्फ मनोरंजन तक सीमित है या उसे समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। बदलते दौर में जब फिल्में बड़े पैमाने पर लोगों की सोच को प्रभावित करती हैं, तब ऐसे सवाल और भी अहम हो जाते हैं।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित व्यक्ति के निजी बयान हैं। लेख का उद्देश्य किसी भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि खबर को तथ्यात्मक और संतुलित रूप में प्रस्तुत करना है।
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