IRFC OFS: शेयर बाजार में आज रेलवे से जुड़ी एक बड़ी सरकारी कंपनी को लेकर हलचल देखने को मिली। Indian Railway Finance Corporation यानी IRFC के शेयरों में उस वक्त दबाव आ गया, जब सरकार ने इसमें अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया। जैसे ही OFS यानी Offer For Sale खुलने की खबर आई, वैसे ही बाजार में इसका असर साफ नजर आने लगा।
IRFC OFS क्या है और क्यों आया बाजार में दबाव
सरकार ने IRFC में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने का फैसला किया है। इसके तहत कुल 4 प्रतिशत तक हिस्सेदारी ऑफलोड की जाएगी। इसमें पहले चरण में 2 प्रतिशत की बिक्री होगी और अगर मांग ज्यादा रहती है, तो अतिरिक्त 2 प्रतिशत ग्रीन शू ऑप्शन के तहत बेचे जा सकते हैं।

OFS की खबर आते ही IRFC के शेयरों में बिकवाली बढ़ गई और एनएसई पर शेयर करीब 4.22 प्रतिशत तक टूटकर 104.82 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया। सरकार ने इस ऑफर के लिए 104 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है, जो बाजार भाव से कम है। यही वजह है कि शेयर पर दबाव देखने को मिला।
सरकार को कितनी रकम जुटाने की उम्मीद
अगर सरकार पूरे 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने में सफल रहती है, तो उसे करीब 5,430 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। यह बिक्री रेल मंत्रालय के तहत की जा रही है। फिलहाल सरकार के पास IRFC में 86.36 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इस बिक्री के बाद घटकर करीब 82.36 प्रतिशत रह जाएगी।
नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए OFS बुधवार को खुला है, जबकि रिटेल निवेशकों को गुरुवार को बोली लगाने का मौका मिलेगा। बाजार जानकारों के मुताबिक, फ्लोर प्राइस आकर्षक होने की वजह से रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी इसमें बनी रह सकती है।
शेयर की चाल और बाजार की प्रतिक्रिया
OFS की घोषणा से पहले IRFC का शेयर बीएसई पर 109.40 रुपये पर बंद हुआ था, लेकिन इसके बाद इसमें करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में यह चिंता दिखी कि सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से निकट भविष्य में शेयर पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशक इसे एक अवसर के तौर पर भी देख रहे हैं।
IRFC का ताजा वित्तीय प्रदर्शन कैसा रहा
IRFC OFS अगर कंपनी के नतीजों की बात करें, तो IRFC का प्रदर्शन कमजोर नहीं कहा जा सकता। दिसंबर 2025 को खत्म तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 10.51 प्रतिशत बढ़कर 1,802 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह मुनाफा 1,631 करोड़ रुपये था।
हालांकि कुल आय में हल्की गिरावट देखने को मिली और यह 6,719 करोड़ रुपये रही, लेकिन खर्चों में कमी आने से मुनाफे को सहारा मिला। कंपनी की नेटवर्थ भी बढ़कर 52,046 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इसके मजबूत वित्तीय आधार को दिखाती है।
IRFC का कारोबार और रेलवे में भूमिका
IRFC OFS की पहचान भारतीय रेलवे की फाइनेंसिंग रीढ़ के तौर पर है। यह कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से फंड जुटाकर रेलवे की परिसंपत्तियों के लिए वित्त उपलब्ध कराती है। 1986 में स्थापित यह कंपनी आज रेलवे की विस्तार योजनाओं में अहम भूमिका निभा रही है। दिसंबर 2025 तक IRFC का AUM यानी Assets Under Management रिकॉर्ड 4.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत

IRFC OFS की वजह से शॉर्ट टर्म में IRFC के शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर मुनाफा और रेलवे से जुड़ा सुरक्षित बिजनेस मॉडल इसे लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए दिलचस्प बनाता है। अब यह निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करता है कि वे इस गिरावट को मौके के रूप में देखते हैं या जोखिम के तौर पर।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना और सामान्य विश्लेषण के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है, इसलिए निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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