Radheshyam Rai: हेलो फ्रेंड्स, होली की तैयारियों और रमजान के पाक महीने के बीच उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। कर्नलगंज कोतवाली में आयोजित शांति समिति की बैठक के दौरान एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस Radheshyam Rai ने कहा कि जिन्हें रंग से परहेज है या जो होली नहीं खेलना चाहते, वे त्योहार के दिन एहतियातन अपने घरों में ही रहें। उनका यह बयान अब तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
शांति समिति की बैठक में दिया गया बयान

Radheshyam Rai होली को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने यह बैठक बुलाई थी। विभिन्न समुदायों के लोगों की मौजूदगी में राधेश्याम राय ने कहा कि होली मस्ती और भाईचारे का त्यौहार है। यह किसी की जाति या धर्म नहीं देखता, बस रंग और खुशियों का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग रंग लगाते समय “बुरा न मानो होली है” कहकर उत्साह जाहिर करते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें रंग पसंद नहीं होता। ऐसे लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए उन्होंने घर में रहने को सबसे सुरक्षित विकल्प बताया।
सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल
बैठक का एक वीडियो तीन दिन बाद सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद इस बयान पर चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश बताया, तो कुछ ने अलग नजरिए से देखा। राय ने यह भी कहा कि त्योहार के दिन कुछ लोग ‘हैप्पी मूड’ में होते हैं, जिन्हें उस समय समझाना आसान नहीं होता। इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है। उन्होंने होली खेलने की समय-सीमा का जिक्र करते हुए बताया कि दोपहर 12 बजे तक मुख्य उत्साह रहता है और करीब दो बजे तक रंग पूरी तरह बंद हो जाता है।
गंगा-जमुनी तहजीब का दिया संदेश

Radheshyam Rai रमजान और होली एक साथ पड़ने के कारण राधेश्याम राय ने मुस्लिम समुदाय से गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि जब शाम को लोग गले मिलते हैं, तो इस बार मुस्लिम भाई हिंदू पड़ोसियों की लाई गुझिया से रोजा खोलकर सौहार्द का संदेश दे सकते हैं। यह बात बैठक में मौजूद कई लोगों को दिल छू गई। स्थानीय निवासी नसीब अली ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाते हैं।
होली रंगों का त्यौहार है और रमजान इबादत व सब्र का महीना। ऐसे में प्रशासन की कोशिश यही है कि दोनों पर्व शांति और सम्मान के साथ मनाए जाएं, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों और खुशियां सबके चेहरे पर बनी रहें।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो में सामने आए बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार तथ्यों में बदलाव संभव है।
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