AI कभी-कभी एक रिपोर्ट, एक लेख या एक विचार पूरे बाजार की धड़कन तेज कर देता है। कुछ ऐसा ही अमेरिका में देखने को मिला, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बेहद डरावना और पूरी तरह काल्पनिक परिदृश्य सोशल मीडिया और निवेशकों के बीच फैल गया। इस रिपोर्ट ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या AI वाकई भविष्य में पूरी अर्थव्यवस्था को हिला सकता है?
एक रिपोर्ट जिसने मचा दी बाजार में हलचल
हाल ही में Citrini Research नाम की एक अमेरिकी फर्म ने Substack पर एक लेख पोस्ट किया। यह कोई भविष्यवाणी नहीं, बल्कि एक “संभावित परिदृश्य” बताया गया था। फिर भी इसने निवेशकों को डरा दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि आने वाले कुछ सालों में AI एजेंट्स इतने ताकतवर हो सकते हैं कि वे अमेरिका की पूरी अर्थव्यवस्था को उलट-पुलट कर दें।

इस रिपोर्ट के सामने आते ही अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। खासतौर पर टेक और सर्विस सेक्टर में बेचैनी फैल गई। कुछ ही समय में Uber, Mastercard और American Express जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 4 से 6 फीसदी तक टूट गए।
AI एजेंट्स और ‘फ्रिक्शन-फ्री’ इकोनॉमी का डर
इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी थ्योरी यह है कि AI एजेंट्स अर्थव्यवस्था से हर तरह की “फ्रिक्शन” यानी बिचौलियों की जरूरत खत्म कर देंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, लोग अपनी जरूरतों के लिए खुद के AI एजेंट्स का इस्तेमाल करेंगे। खाना मंगाने के लिए अलग ऐप, टैक्सी के लिए अलग प्लेटफॉर्म या पेमेंट के लिए कार्ड इन सबकी जगह मशीनें खुद फैसला लेंगी।
कल्पना कीजिए कि लोग खुद के AI से फूड डिलीवरी या ट्रैवल बुकिंग करवाने लगें। ऐसे में Uber, DoorDash और पेमेंट कंपनियों का बिजनेस मॉडल ही कमजोर पड़ सकता है। यही सोच निवेशकों को सबसे ज्यादा डराने वाली लगी।
सफेदपोश नौकरियों पर सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा नौकरियों को लेकर किया गया है। इसमें कहा गया कि AI सिर्फ कुछ काम नहीं छीनेगा, बल्कि वह उन कामों में भी बेहतर हो जाएगा, जहां इंसानों को दोबारा लगाया जा सकता था। यानी कोडर, मैनेजर और दूसरे व्हाइट-कॉलर प्रोफेशनल्स के लिए नई नौकरियां बनना मुश्किल हो जाएगा।
इसका असर यह होगा कि बड़े पैमाने पर लोग गिग इकॉनमी की अस्थिर नौकरियों की ओर धकेले जाएंगे। सैलरी घटेगी, खर्च कम होगा और कंपनियां इंसानों की जगह और ज्यादा AI में निवेश करेंगी। रिपोर्ट इसे एक ऐसा “फीडबैक लूप” बताती है, जिसमें रुकने का कोई ब्रेक नहीं होगा।
कर्ज, मकान और बाजार तक फैलेगा असर
रिपोर्ट यह भी कहती है कि जब नौकरियां जाएंगी और सैलरी घटेगी, तो लोग अपने होम लोन और दूसरे कर्ज चुकाने में फेल होंगे। इससे प्राइवेट क्रेडिट और मॉर्गेज सेक्टर में संकट आएगा। निवेशकों की नजर में यह एक डोमिनो इफेक्ट जैसा है, जहां एक सेक्टर गिरता है और बाकी भी उसके साथ खिंचते चले जाते हैं।
‘घोस्ट GDP’ और सामाजिक असंतोष की कल्पना
इस रिपोर्ट में एक दिलचस्प शब्द इस्तेमाल किया गया है घोस्ट GDP। इसका मतलब है ऐसी आर्थिक ग्रोथ जो कागजों पर तो दिखती है, लेकिन आम लोगों तक नहीं पहुंचती। रिपोर्ट के मुताबिक, AI कंपनियां मुनाफा कमाती रहेंगी, लेकिन आम जनता की हालत खराब होगी।
यहां तक कहा गया है कि हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि “Occupy Silicon Valley” जैसा आंदोलन खड़ा हो जाए, जहां लोग AI कंपनियों के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन करें।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
कई मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह रिपोर्ट जरूरत से ज्यादा डर पैदा करती है। उनका कहना है कि AI अभी इतनी ताकतवर नहीं है कि वह यह सब तुरंत कर सके। लेकिन यह भी सच है कि आज के बाजार इतने संवेदनशील हो चुके हैं कि एक वायरल थॉट पीस भी शेयर बाजार को हिला सकता है।

AI को लेकर डर और उम्मीद दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। Citrini की रिपोर्ट भले ही पूरी तरह काल्पनिक हो, लेकिन इसने यह जरूर दिखा दिया कि निवेशक AI के भविष्य को लेकर कितने असमंजस में हैं। यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि तकनीक के साथ नई नीतियां और नए ढांचे बनाना कितना जरूरी हो गया है।
Disclaimer: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और विश्लेषण पर आधारित है। इसमें बताए गए परिदृश्य काल्पनिक हैं और निवेश या आर्थिक फैसलों के लिए इन्हें सलाह के रूप में न लें। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।
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