Air Pollution दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। स्मॉग, धूल, गाड़ियों का धुआं और फैक्ट्री का प्रदूषण सब मिलकर सांस लेना मुश्किल बना देते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा असर हमारे फेफड़ों और इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। हर कोई यही सोच रहा है कि इस हालात में खुद को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
इसी बीच मशहूर लाइफस्टाइल कोच और न्यूट्रिशनिस्ट ल्यूक कुटिन्हो ने सोशल मीडिया पर एक खास जड़ी-बूटी का जिक्र किया है, जो सांस से जुड़ी समस्याओं में मददगार मानी जाती है। उनका कहना है कि यह उपाय एलोपैथी का विकल्प नहीं है, बल्कि एक सपोर्ट सिस्टम की तरह काम कर सकता है।
क्या है कलमेघ और क्यों हो रही है चर्चा?
Air Pollution ल्यूक कुटिन्हो ने जिस जड़ी-बूटी की बात की है, उसका नाम है कलमेघ। वैज्ञानिक भाषा में इसे एंड्रोग्राफिस पैनिकुलाटा कहा जाता है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। इसे खासतौर पर इम्यूनिटी बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में सहायक माना जाता है।

Air Pollution दिल्ली की मौजूदा प्रदूषण स्थिति को देखते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि कलमेघ का सीमित और सही तरीके से सेवन श्वसन तंत्र को सपोर्ट कर सकता है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान भी इस जड़ी-बूटी का रणनीतिक उपयोग कुछ मरीजों में किया गया था।
श्वसन स्वास्थ्य के लिए संभावित लाभ
Air Pollution कलमेघ को एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-वायरल गुणों के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से गले में खराश, खांसी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में यह जड़ी-बूटी फेफड़ों को सपोर्ट देने में सहायक हो सकती है।
हालांकि, ल्यूक कुटिन्हो ने साफ किया है कि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी भी हर्बल उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
प्रदूषण के दौर में क्या रखें ध्यान?

Air Pollution प्राकृतिक उपायों के साथ-साथ कुछ जरूरी सावधानियां भी बेहद अहम हैं। बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें, घर में एयर प्यूरीफायर या पौधे रखें और भरपूर पानी पिएं। हेल्दी डाइट और नियमित व्यायाम भी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। प्रदूषण से पूरी तरह बच पाना शायद संभव न हो, लेकिन सही जानकारी और सावधानी से इसके असर को कम जरूर किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताए गए हर्बल उपाय किसी भी प्रकार से एलोपैथिक इलाज का विकल्प नहीं हैं। किसी भी दवा या जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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