Assembly Elections: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) चुनावी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग 27 वर्षों बाद राष्ट्रीय स्तर का गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conference) आयोजित कर रहा है। यह सम्मेलन मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होगा, जिसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त भाग लेंगे।
यह सम्मेलन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछली बार ऐसा आयोजन करीब तीन दशक पहले किया गया था। बदलते चुनावी परिदृश्य और तकनीकी चुनौतियों के बीच इसे चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता और प्रमुख चेहरे
Assembly Elections इस राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे। उनके साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहेंगे।

सम्मेलन में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त (SEC) अपने-अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ शामिल होंगे। इसके अलावा सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) भी इस अहम बैठक का हिस्सा होंगे।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
चुनाव आयोग के अनुसार, इस सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (SEC) के बीच कार्यप्रणाली में बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि अलग-अलग संवैधानिक दायित्वों के बावजूद चुनावी प्रक्रियाएं ज्यादा समन्वित और पारदर्शी बन सकें।
Assembly Elections आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह मंच रचनात्मक विचारों के आदान-प्रदान, अनुभव साझा करने और सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने का काम करेगा।
किन मुद्दों पर होगी अहम चर्चा?
दिनभर चलने वाले इस गोलमेज सम्मेलन में कई अहम विषयों पर गहन मंथन होगा, जिनमें शामिल हैं:
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निर्वाचन प्रक्रियाओं को मजबूत करने के उपाय
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प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा
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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सुरक्षा, पारदर्शिता और मजबूती
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मतदाता सूचियों (Voter List) के निर्माण और साझा करने की प्रक्रिया
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चुनावी सेवाओं को डिजिटल रूप से सरल बनाने की रणनीति
Assembly Elections इस दौरान चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष प्रस्तुतियां देंगे और बताएंगे कि यह प्लेटफॉर्म किस तरह चुनावी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बना सकता है।
मतदाता पात्रता और कानूनी ढांचे पर भी होगा मंथन
Assembly Elections सम्मेलन में जन प्रतिनिधि अधिनियम, 1950 के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता पात्रता से जुड़े नियमों की तुलनात्मक प्रस्तुति भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में लागू कानूनी प्रावधानों को समझना और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाना है।
राज्य निर्वाचन आयोगों की संवैधानिक भूमिका
Assembly Elections राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के तहत किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 243K और 243ZA के अनुसार पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव कराने तथा उनकी मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयुक्तों को सौंपी गई है। ऐसे में यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के चुनावी दायित्वों के बीच संतुलन और बेहतर समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
क्यों अहम माना जा रहा है यह सम्मेलन?

चुनावी प्रक्रिया में तकनीक, पारदर्शिता और भरोसे की भूमिका लगातार बढ़ रही है। 27 साल बाद हो रहा यह गोलमेज सम्मेलन आने वाले चुनावों से पहले नीतिगत स्पष्टता, तकनीकी तालमेल और प्रशासनिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के निष्कर्ष भविष्य की चुनावी व्यवस्थाओं पर दूरगामी असर डाल सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख आधिकारिक बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। सम्मेलन से जुड़े निर्णय और निष्कर्ष समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट और अधिसूचनाओं को ही अंतिम मानें।
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