Pakistan-Afghanistan के बीच हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र का ध्यान खींच लिया है। सीमा पर तेज होती झड़पें, हवाई हमले और ड्रोन स्ट्राइक ने दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है। अभी कई दावों-प्रतिदावों की स्वतंत्र पुष्टि बाकी है, लेकिन जो तस्वीर सामने आ रही है, वह हालात की गंभीरता को दिखाती है।
क्या हुआ और कब शुरू हुआ टकराव
गुरुवार, 26 फरवरी की शाम से सीमा के कई इलाकों में गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की खबरें आने लगीं। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा कि उसने पाकिस्तान के सीमा-नजदीकी सैन्य ठिकानों पर अभियान चलाया। इसके कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए काबुल और सीमा से सटे प्रांतों में लक्ष्यों पर बमबारी की बात कही।

Pakistan-Afghanistan टोरखम बॉर्डर के पास भी झड़पों की खबरें आईं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगा रहे हैं और भारी नुकसान पहुंचाने के दावे कर रहे हैं। हताहतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी संभव नहीं हो पाई है।
ड्रोन और हवाई हमलों का नया चरण
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान पक्ष की ओर से ड्रोन के इस्तेमाल की बात कही गई है। पाकिस्तान के एक सैन्य अधिकारी ने तीन जगह ड्रोन हमलों का दावा करते हुए कहा कि उन्हें नाकाम कर दिया गया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ड्रोन का इस्तेमाल हुआ है, तो यह सीमा तनाव के नए और असामान्य चरण की ओर इशारा करता है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भी सीमा पार लक्ष्यों पर बमबारी की बात कही है। यह दौर अक्टूबर में हुए संघर्ष और उसके बाद हुए नाजुक युद्धविराम के टूटने का संकेत माना जा रहा है।
दोनों पक्षों के आरोप और सख्त बयान
Pakistan-Afghanistan के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उनकी सेना किसी भी चुनौती का “कड़ा जवाब” देने में सक्षम है। वहीं रक्षा मंत्री ने “खुले युद्ध” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। अफगान तालिबान के प्रवक्ताओं ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, लेकिन यह भी कहा कि वे पहले पहल टकराव शुरू नहीं करना चाहते।
दोनों देशों के बीच लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी जमीन पर होने वाले हमलों के लिए अफगान धरती का इस्तेमाल होता है। तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है और कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन इस्तेमाल नहीं होने देगी।
अंतरराष्ट्रीय अपील और मध्यस्थता की कोशिश
Pakistan-Afghanistan संयुक्त राष्ट्र ने तुरंत तनाव कम करने की अपील की है। ईरान, जो दोनों देशों का पड़ोसी है, ने मध्यस्थता की पेशकश की है। चीन ने भी संयम बरतने और युद्धविराम की अपील की है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के साथ बातचीत कर तनाव घटाने के रास्तों पर चर्चा की है। रमज़ान के महीने का हवाला देते हुए शांति और संयम की अपीलें भी सामने आई हैं, ताकि हालात और न बिगड़ें।
आगे क्या हो सकता है
विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के साथ पारंपरिक युद्ध की संभावना कम है, लेकिन सीमा पर छिटपुट संघर्ष और ड्रोन/हवाई हमलों का खतरा बना रह सकता है। यदि सरकारी ठिकानों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ती हैं, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। इस समय सबसे अहम बात यह है कि संवाद के रास्ते खुले रहें और दोनों पक्ष संयम बरतें, क्योंकि लंबा टकराव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच ताजा घटनाएं एक नाजुक मोड़ की ओर इशारा करती हैं। दावों और बयानों के बीच सच्चाई की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है, लेकिन इतना साफ है कि हालात संवेदनशील हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक समुदाय की अपीलों के बीच उम्मीद यही है कि तनाव कम होगा और बातचीत का रास्ता निकलेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्ट्स और बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी लंबित है। किसी भी नए आधिकारिक अपडेट के अनुसार स्थिति बदल सकती है।
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