Pm Modi की इज़राइल यात्रा इस समय देश–दुनिया में खूब चर्चा में है। दो दिनों के इस दौरे के आख़िरी दिन पीएम मोदी ने इज़राइल के राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग से मुलाकात की और भारत–इज़राइल संबंधों को एक नई दिशा देने वाले कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। बातचीत का फोकस शिक्षा, स्टार्ट-अप्स, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर रहा।
इनोवेशन और कृषि में सहयोग बढ़ाने पर सहमति

Pm Modi और राष्ट्रपति हर्ज़ोग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच कई MoUs साइन किए गए, जिनका मकसद आपसी सहयोग को और गहरा करना है। खास तौर पर कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और नई तकनीकों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने भारत को मिडिल ईस्ट के भविष्य का अहम हिस्सा बताया और कहा कि भारत और इज़राइल मिलकर एक बेहतर वैश्विक भविष्य गढ़ सकते हैं।
Pm Modi का संदेश और भारत की भूमिका
Pm Modi ने इस दौरान इज़राइल के साथ भारत की “विशेष साझेदारी” का ज़िक्र किया और राष्ट्रपति हर्ज़ोग को भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक विकास में भी अहम योगदान दे सकता है। पहले दिन पीएम मोदी ने यह भी साफ किया था कि भारत आतंकवाद के हर रूप का विरोध करता है और कहीं भी आतंकवाद शांति के लिए खतरा है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और ग़ाज़ा पर सवाल
Pm Modi हालांकि इस यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज़ हो गई है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने पीएम मोदी के इज़राइल दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहिए जिससे यह लगे कि वह ग़ाज़ा में हो रही मानवीय त्रासदी पर आंख मूंद रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत की पारंपरिक नीति हमेशा मानवता, न्याय और समानता के पक्ष में रही है और भारत को फ़िलिस्तीन के स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के समर्थन पर अडिग रहना चाहिए।
कूटनीति, संतुलन और आगे की राह
इस पूरी यात्रा ने एक बार फिर यह दिखाया कि भारत की विदेश नीति में संतुलन कितना अहम है। एक तरफ़ इज़राइल के साथ तकनीक और इनोवेशन में मजबूत साझेदारी, तो दूसरी तरफ़ ग़ाज़ा और फ़िलिस्तीन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मानवीय दृष्टिकोण। आने वाले समय में भारत के लिए चुनौती यही होगी कि वह रणनीतिक साझेदारियों को आगे बढ़ाते हुए अपने नैतिक और ऐतिहासिक रुख को भी बनाए रखे।

Pm Modi की इज़राइल यात्रा भारत–इज़राइल संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश है। समझौते और बातचीत भविष्य के लिए कई अवसर खोलते हैं, लेकिन साथ ही यह दौरा विदेश नीति में संतुलन और संवेदनशीलता की अहमियत भी याद दिलाता है। दुनिया की नजरें अब इस पर हैं कि भारत आगे किस तरह इन रिश्तों को आकार देता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स और बयानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है, न कि किसी राजनीतिक दल, देश या व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में राय बनाना।
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