UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने जीत सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा विधायकों और संभावित प्रत्याशियों का दूसरे चरण का बड़ा सर्वे कराने का फैसला लिया है। यह सर्वे फरवरी के दूसरे या तीसरे हफ्ते से शुरू होने की संभावना है। उद्देश्य साफ है ज़मीनी सच्चाई समझना और टिकट वितरण में डेटा आधारित निर्णय लेना।
बीजेपी नेतृत्व मानता है कि सिर्फ संगठन की रिपोर्ट काफी नहीं, बल्कि जनता की असली राय ही चुनाव जिताती है।
UP Politics दो कंपनियों से सर्वे, निष्पक्ष रिपोर्ट पर जोर

पहले चरण का सर्वे एक एजेंसी से कराया जा चुका है। अब पार्टी ने रणनीति बदलते हुए दूसरे सर्वे के लिए अलग कंपनी चुनी है। दोनों रिपोर्टों का मिलान किया जाएगा ताकि किसी भी तरह का पक्षपात या अधूरी जानकारी सामने न आए।
यह मॉडल बीजेपी 2022 चुनाव में भी इस्तेमाल कर चुकी है, जहां सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बड़े पैमाने पर टिकट बदले गए थे।
विधायकों की परफॉर्मेंस की होगी असली परीक्षा
सर्वे में खास तौर पर इन बिंदुओं पर फोकस रहेगा:
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जनता से सीधा संपर्क
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विकास कार्यों की स्थिति
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क्षेत्र में सक्रियता
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संगठन के साथ तालमेल
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व्यक्तिगत छवि
पार्टी यह जानना चाहती है कि विधायक सिर्फ पद पर हैं या जनता के बीच भरोसेमंद नेता भी हैं।
निगेटिव रिपोर्ट पर टिकट कटना तय
वरिष्ठ नेताओं के अनुसार जिन विधायकों की रिपोर्ट खराब आएगी, उनके लिए टिकट बचाना मुश्किल होगा। पार्टी अब भावनात्मक या पुराने समीकरणों के बजाय डेटा और जनमत को प्राथमिकता दे रही है।
यह संदेश भी साफ है कि 2027 में टिकट प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा, न कि सिर्फ पुराने राजनीतिक वजन पर।
UP Politics जमीनी स्तर से लिया जाएगा फीडबैक
सर्वे टीम केवल कागजी आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहेगी। एजेंसी के लोग सीधे बाजारों, मोहल्लों और सार्वजनिक जगहों पर जाकर आम जनता से बात करेंगे। दुकानदारों, युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, वकीलों और सामाजिक संगठनों से राय ली जाएगी।
साथ ही जिला संगठन, मंडल पदाधिकारी और RSS से जुड़े कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लिया जाएगा ताकि संगठनात्मक ताकत का भी आकलन हो सके।
2022 का मॉडल, 2027 की तैयारी
2022 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 165 सीटों पर नए चेहरे उतारे थे और 120 से ज्यादा विधायकों के टिकट काटे थे। पार्टी मानती है कि उसी रणनीति ने चुनावी सफलता में बड़ी भूमिका निभाई थी।
अब 2027 के लिए उसी मॉडल को और मजबूत किया जा रहा है।

बीजेपी का यह सर्वे केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति की रीढ़ माना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य साफ है हर सीट पर सबसे मजबूत उम्मीदवार उतारना। आने वाले महीनों में यह सर्वे तय करेगा कि कौन विधायक जनता की कसौटी पर खरा उतरता है और किसे टिकट से हाथ धोना पड़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स और राजनीतिक जानकारी पर आधारित है। अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।
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