हर साल लाखों छात्र JEE Main परीक्षा पास करके देश के टॉप NITs में एडमिशन का सपना देखते हैं। कई छात्रों की रैंक शानदार होने के बावजूद उन्हें मनचाहा कॉलेज या ब्रांच नहीं मिल पाती, जबकि कुछ छात्रों को कम रैंक पर भी आसानी से सीट मिल जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण होता है Home State Quota और Other State Quota का नियम। अगर छात्र और अभिभावक इस सिस्टम को समय रहते सही तरीके से नहीं समझते, तो एक साल की मेहनत और अच्छा स्कोर भी बेकार जा सकता है।
क्या होता है Home State Quota?

देश के ज्यादातर NITs में लगभग 50 प्रतिशत सीटें उस राज्य के छात्रों के लिए रिजर्व रहती हैं, जहां वह NIT स्थित है। इसे Home State Quota कहा जाता है। बाकी 50 प्रतिशत सीटें देश के अन्य राज्यों के छात्रों के लिए होती हैं, जिन्हें Other State Quota कहा जाता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी छात्र ने तमिलनाडु से 12वीं पास की है, तो उसे NIT Trichy में Home State का फायदा मिलेगा। वहीं उत्तर प्रदेश या बिहार के छात्रों को उसी कॉलेज में Other State कोटे के तहत मुकाबला करना होगा।
यही वजह है कि कई बार एक ही ब्रांच के लिए Home State छात्रों की कटऑफ काफी कम रहती है, जबकि Other State छात्रों के लिए कटऑफ बहुत ज्यादा चली जाती है।
कैसे तय होता है Home State?
कई छात्रों को लगता है कि उनका स्थायी पता या डोमिसाइल ही Home State माना जाएगा, लेकिन JoSAA के नियम इससे अलग हैं। JoSAA के अनुसार Home State वही माना जाता है, जहां से छात्र ने पहली बार 12वीं बोर्ड परीक्षा पास की हो।
अगर किसी छात्र का परिवार बिहार में रहता है लेकिन उसने 12वीं झारखंड से पास की है, तो JoSAA Counselling में उसका Home State झारखंड ही माना जाएगा। इसलिए छात्रों को फॉर्म भरते समय इस नियम को बहुत ध्यान से समझना चाहिए।
टॉप NITs में क्यों बढ़ जाता है फर्क?
National Institute of Technology Trichy, Warangal और Surathkal जैसे टॉप NITs में सीटों के लिए बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा होती है। यहां Home State और Other State कटऑफ में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
कम प्रतिस्पर्धा वाले राज्यों के छात्रों को कई बार इसका सीधा फायदा मिलता है। वहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धा वाले राज्यों के छात्रों के लिए अच्छी रैंक के बावजूद सीट पाना मुश्किल हो सकता है।
IITs और IIITs में क्या नियम हैं?
IITs में Home State Quota लागू नहीं होता। वहां एडमिशन पूरी तरह All India Rank के आधार पर दिया जाता है। वहीं कई IIITs और GFTIs में अलग नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए छात्रों को Counselling से पहले हर संस्थान की सीट पॉलिसी जरूर समझनी चाहिए।
Choice Filling के समय क्यों जरूरी है सही जानकारी?
JoSAA Counselling के दौरान कई छात्र सिर्फ कॉलेज का नाम देखकर ऑप्शन भर देते हैं। लेकिन अगर HS और OS Quota को समझे बिना चॉइस फिलिंग की जाए, तो सीट मिलने की संभावना कम हो सकती है। सही रणनीति और State Quota की जानकारी छात्रों को बेहतर कॉलेज और ब्रांच दिलाने में मदद कर सकती है।
Home State और Other State Quota की मुख्य जानकारी
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| Home State Quota | NIT वाले राज्य के छात्रों के लिए लगभग 50% सीटें |
| Other State Quota | बाकी राज्यों के छात्रों के लिए 50% सीटें |
| Home State कैसे तय होता है | जहां से 12वीं पहली बार पास की हो |
| लागू संस्थान | ज्यादातर NITs |
| IITs में नियम | HS Quota लागू नहीं |
जरूरी बातें

- NITs में HS और OS Quota बहुत अहम होता है
- 12वीं पास करने वाला राज्य ही Home State माना जाता है
- टॉप NITs में कटऑफ का अंतर काफी बड़ा हो सकता है
- IITs में Home State Quota नहीं होता
- JoSAA Choice Filling से पहले नियम समझना जरूरी है
Disclaimer:
यह लेख सार्वजनिक जानकारी और JoSAA नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। एडमिशन और काउंसलिंग से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए छात्र आधिकारिक JoSAA वेबसाइट और संबंधित संस्थानों की वेबसाइट जरूर चेक करें।
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