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Gold-Silver के ETF में बड़ा बदलाव 1 अप्रैल 2026 से बदलेगा कीमत तय करने का तरीका, निवेशकों के लिए क्या मायने?

By: Abhinav Prajapati

On: Saturday, February 28, 2026 9:10 AM

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Gold-Silver: अगर आप सोने या चांदी के ETF में निवेश करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। 1 अप्रैल 2026 से गोल्ड और सिल्वर ETF की कीमत तय करने का तरीका बदलने जा रहा है। बाजार नियामक सेबी ने नया नियम लागू करने का फैसला किया है, जिससे निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता और स्पष्टता मिल सके।

पहले कैसे तय होती थी गोल्ड और सिल्वर ETF की कीमत

Gold-Silver अब तक गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यू सीधे भारतीय बाजार के रेट से नहीं तय होती थी। इसके लिए London Bullion Market Association के लंदन रेट को आधार माना जाता था। फिर उस कीमत को डॉलर से रुपये में बदला जाता था। इसके बाद टैक्स, कस्टम ड्यूटी और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्च जोड़े जाते थे।

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इन सभी जोड़-घटाव के बाद भारत में ETF की कीमत निकलती थी। यानी निवेशक जिस ETF में पैसा लगा रहा था, उसकी कीमत विदेशी बाजार के आधार पर तय हो रही थी, न कि सीधे घरेलू स्पॉट प्राइस से।

अब क्या बदलेगा 1 अप्रैल 2026 से

Gold-Silver नए नियम के तहत अब म्यूचुअल फंड कंपनियां सोना और चांदी की कीमत भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर जारी स्पॉट प्राइस के आधार पर तय करेंगी। इसका मतलब है कि ETF की NAV अब सीधे घरेलू बाजार की वास्तविक कीमत से जुड़ेगी। अब विदेशी रेट को रुपये में बदलने और उसमें अलग-अलग खर्च जोड़ने की प्रक्रिया नहीं होगी। इससे कीमत तय करने का तरीका ज्यादा सरल और पारदर्शी बन जाएगा।

निवेशकों को क्या फायदा होगा

सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता का होगा। अब निवेशकों को यह समझना आसान होगा कि उनके ETF की कीमत किस आधार पर तय हो रही है। विदेशी बाजार के उतार-चढ़ाव और कन्वर्जन के जटिल गणित से राहत मिलेगी।

Gold-Silver इसके अलावा अलग-अलग गोल्ड ETF स्कीमों के रिटर्न में जो छोटा-मोटा फर्क नजर आता था, वह भी कम हो सकता है, क्योंकि सभी कंपनियां एक समान घरेलू स्पॉट प्राइस का इस्तेमाल करेंगी। घरेलू बाजार से सीधा जुड़ाव होने का मतलब यह भी है कि भारतीय मांग और सप्लाई का असर ज्यादा स्पष्ट रूप से ETF की कीमत में दिखेगा।

AMFI और सेबी की भूमिका

इस नए नियम को लागू करने के लिए सेबी के साथ Association of Mutual Funds in India भी मिलकर एक समान नीति तैयार करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी म्यूचुअल फंड कंपनियां एक ही मानक और एक जैसे तरीके से कीमत तय करें। इससे निवेशकों के बीच भरोसा और बढ़ेगा और बाजार में एकरूपता आएगी।

Gold-Silver

1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नया नियम गोल्ड और सिल्वर ETF निवेशकों के लिए एक अहम बदलाव लेकर आ रहा है। अब कीमत विदेशी रेट की बजाय भारतीय स्पॉट प्राइस पर आधारित होगी, जिससे पारदर्शिता और स्पष्टता दोनों बढ़ेंगी। अगर आप भी सोने-चांदी में निवेश करते हैं, तो इस बदलाव को समझना जरूरी है ताकि आप सही और सूझबूझ भरा निर्णय ले सकें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें और आधिकारिक नियमों व नोटिफिकेशन की पुष्टि करें। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।

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Abhinav Prajapati

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