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NEET Success Story: 35 किलो वजन और गंभीर बीमारी के बावजूद बेटी ने पास की NEET परीक्षा, AIIMS में पाया एडमिशन

By: Tanu

On: Tuesday, May 5, 2026 6:14 PM

NEET Success Story
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NEET Success Story: सपने वही सच होते हैं जिनके लिए इंसान हर मुश्किल से लड़ने को तैयार रहता है। NEET जैसी कठिन परीक्षा को पास करना लाखों छात्रों का सपना होता है, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो संघर्षों के बीच भी हार नहीं मानते। प्रयागराज की रहने वाली अनुराधा सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

गंभीर बीमारी, कमजोर शरीर और लगातार असफलताओं के बावजूद अनुराधा ने अपने डॉक्टर बनने के सपने को टूटने नहीं दिया। मजबूत इरादों और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने आखिरकार NEET परीक्षा पास की और AIIMS देवघर में एडमिशन हासिल कर लिया।

प्रयागराज की बेटी ने संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

NEET Success Story
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक छोटे से गांव से आने वाली अनुराधा सिंह एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। बचपन से ही उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना था। हालांकि शुरुआती पढ़ाई में वे एक एवरेज स्टूडेंट मानी जाती थीं।

9वीं कक्षा तक अनुराधा की पढ़ाई सामान्य थी, लेकिन उसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह बदल लिया। उन्होंने तय कर लिया कि अब उन्हें अपने सपने के लिए पूरी मेहनत करनी है। यही सोच उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गई।

पहले प्रयास में मिली असफलता

अनुराधा ने 11वीं कक्षा से ही NEET UG परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने दिन-रात मेहनत की, लेकिन पहले प्रयास में उन्हें सिर्फ 442 अंक मिले। यह उनके लिए बड़ा झटका था।

हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी की रणनीति बदली। उन्होंने NCERT किताबों पर ज्यादा फोकस करना शुरू किया और बेस मजबूत करने पर ध्यान दिया। साथ ही नियमित मॉक टेस्ट और लगातार रिवीजन को अपनी पढ़ाई का हिस्सा बना लिया।

बीमारी ने बढ़ाईं मुश्किलें

NEET की बेहतर तैयारी के लिए अनुराधा कोटा चली गईं। लेकिन इसी दौरान कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी। गंभीर बीमारी की वजह से उनका वजन घटकर सिर्फ 35 किलो रह गया था। हालत इतनी खराब हो गई कि वे लंबे समय तक बिस्तर पर रहीं।

इतनी बड़ी परेशानी के बावजूद अनुराधा ने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उनके परिवार, खासकर पिता ने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया और उनका हौसला बनाए रखा।

तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता

बीमारी से बाहर आने के बाद अनुराधा ने दोबारा पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 597 अंक हासिल किए। इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की और AIIMS देवघर में एडमिशन पाने का सपना पूरा कर लिया।

उनकी यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल इंसान को रोक नहीं सकती।

अनुराधा की सफलता से सीखने वाली बातें

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  • असफलता के बाद हार नहीं माननी चाहिए
  • NCERT और रिवीजन पर फोकस जरूरी है
  • मानसिक मजबूती सफलता की कुंजी है
  • परिवार का सपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होता है
  • लगातार मेहनत ही सपनों को सच बनाती है

निष्कर्ष

अनुराधा सिंह की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी मुश्किल से गुजर रहे हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर मेहनत और आत्मविश्वास बना रहे तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी यह सफलता आज हर NEET उम्मीदवार को आगे बढ़ने का हौसला देती है।

Disclaimer: यह लेख केवल प्रेरणात्मक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।

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