Social Media Age Limit: भारत में Social Media Age Limit को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने सुझाव दिया है कि बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को “predatory” यानी उपयोगकर्ताओं को ज्यादा समय तक बांधे रखने वाली प्रणाली बताया।
यह सिफारिश भारत के वार्षिक आर्थिक सर्वे में शामिल की गई है, जो अक्सर भविष्य की नीतियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि ये सुझाव अभी बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन इससे आने वाले समय में बड़े डिजिटल नियमों की संभावना मजबूत हो गई है।
क्यों उठी Social Media Age Limit की मांग

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, युवा यूजर्स खासकर 15 से 24 साल के बीच के लोग एल्गोरिदम का सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं। सस्ती इंटरनेट सेवाओं के कारण भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट कहती है कि 75% युवा स्मार्टफोन यूजर्स नियमित रूप से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।
सलाहकार ने चेतावनी दी कि डिजिटल लत पढ़ाई, नींद और कार्यक्षमता पर सीधा असर डाल रही है। उन्होंने परिवारों को स्क्रीन टाइम लिमिट, डिवाइस-फ्री समय और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की सलाह दी।
दुनिया के कई देश पहले ही उठा चुके कदम
भारत अगर उम्र आधारित रोक लगाता है तो वह अकेला नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाला पहला देश बन चुका है। फ्रांस, ब्रिटेन, डेनमार्क और ग्रीस भी इसी दिशा में कानून पर काम कर रहे हैं।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। यहां करीब 1 अरब इंटरनेट यूजर्स हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में YouTube के 50 करोड़, Instagram के 48 करोड़ और Facebook के 40 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, जिससे यह कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बाजार बनता है।
कंपनियों और विशेषज्ञों की अलग राय
Meta जैसी कंपनियां कहती हैं कि वे पेरेंटल कंट्रोल कानून का समर्थन करती हैं, लेकिन सीधा बैन बच्चों को असुरक्षित प्लेटफॉर्म की तरफ धकेल सकता है। वहीं कुछ तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र आधारित प्रतिबंध को बच्चे नकली पहचान से आसानी से पार कर सकते हैं।
फिर भी कई राज्य सरकारें इस मुद्दे पर गंभीर हैं। आंध्र प्रदेश और गोवा ने ऑस्ट्रेलिया के मॉडल का अध्ययन शुरू कर दिया है।

भारत में सोशल मीडिया की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उतनी ही तेजी से इसके दुष्प्रभावों पर चिंता भी बढ़ रही है। उम्र आधारित नियंत्रण पर बहस अब नीति स्तर पर पहुंच चुकी है। आने वाले समय में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बन सकती है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक नीति बदलाव के लिए सरकारी अधिसूचना देखें।
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