जब कोई युवा पढ़ाई, परीक्षा और करियर के सपनों के साथ आगे बढ़ता है, तो उसके सामने उम्मीदों का दबाव भी बढ़ सकता है। हालिया IIT Bombay छात्र की मौत के बाद देश में छात्रों की मानसिक सेहत और शैक्षणिक दबाव को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है। लेकिन Students Suicide in India को केवल परीक्षा या करियर के दबाव से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। NCRB के आंकड़े इस समस्या की व्यापकता समझने में मदद करते हैं।
NCRB के आंकड़ों में क्या सामने आया?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 1,70,746 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। यह संख्या 2023 के 1,71,418 मामलों से थोड़ी कम है और आत्महत्या दर भी 12.3 से घटकर 12.2 प्रति लाख हुई।
इसके उलट छात्रों से जुड़े आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2024 में 14,488 छात्रों की आत्महत्या दर्ज की गई, जो 2023 के 13,892 मामलों से करीब 4.3 प्रतिशत अधिक है। कुल आत्महत्या मामलों में छात्रों की हिस्सेदारी 8.5 प्रतिशत रही।
Students Suicide in India के आंकड़ों को लंबे समय के संदर्भ में देखें तो 2020 में 12,526 छात्र आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं। 2024 तक यह संख्या 14,488 हो गई। 2015 से 2024 के बीच 1.15 लाख से ज्यादा छात्र आत्महत्याएं दर्ज की गईं।
क्या सिर्फ पढ़ाई का दबाव जिम्मेदार है?
Students Suicide in India पर चर्चा करते समय यह समझना जरूरी है कि आंकड़े किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराते। NCRB के 2024 आंकड़ों में कुल आत्महत्याओं के प्रमुख दर्ज कारणों में पारिवारिक समस्याएं, बीमारी और नशे की लत शामिल हैं। वहीं छात्रों के मामले में परीक्षा में असफलता भी दर्ज कारणों में शामिल है। इसलिए अकादमिक दबाव इस समस्या का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे अकेला कारण मानना सही नहीं होगा।
IIT Kharagpur Director ने छात्रों से क्या कहा?

IIT Bombay मामले के बाद IIT Kharagpur के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने छात्रों को परीक्षा को जीवन से बड़ा न मानने का संदेश दिया। उन्होंने तैयारी पर भरोसा रखने, पर्याप्त नींद लेने और दबाव ज्यादा महसूस होने पर किसी से बात करने की सलाह दी। उनका संदेश था कि एक परीक्षा या ग्रेड किसी छात्र की पूरी पहचान और भविष्य तय नहीं करता।
Students Suicide in India के आंकड़े एक जरूरी संदेश देते हैं कि छात्रों की परेशानियों को समय रहते सुनना और उन्हें भरोसेमंद सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। पढ़ाई और सफलता जरूरी हैं, लेकिन छात्र की जिंदगी और उसका भविष्य किसी एक परीक्षा के परिणाम से कहीं बड़ा है।
Disclaimer: यह लेख NCRB के उपलब्ध आंकड़ों और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। आत्महत्या के मामलों में व्यक्तिगत परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं और किसी घटना का कारण जांच के बिना तय नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई छात्र खुद को असहाय या अत्यधिक दबाव में महसूस कर रहा है, तो उसे तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति, शिक्षक, परिवारजन या पेशेवर सहायता से संपर्क करना चाहिए।
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