आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने पढ़ाई की दुनिया को तेजी से बदल दिया है। आज छात्र जानकारी हासिल करने से लेकर कठिन सवाल समझने तक AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जब यही तकनीक परीक्षा में बिना अनुमति इस्तेमाल होती है, तो शैक्षणिक ईमानदारी और परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हाल ही में सामने आए IIT Bombay AI Cheating मामले ने इसी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
IIT Bombay में परीक्षा के दौरान क्या हुआ?

IIT Bombay के अनुसार, एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान का कहना है कि छात्र ने सवालों के जवाब पाने के लिए परीक्षा के प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड किया था। IIT Bombay ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और विभागाध्यक्ष तथा इंस्ट्रक्टर ने उससे बातचीत कर उसे आश्वस्त किया था कि इस घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
इसके बाद छात्र की मौत हो गई, जिसके बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों की ओर से कुछ अलग दावे सामने आए हैं, जबकि संस्थान ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू किए जाने की बात से इनकार किया है। मामले की जांच चल रही है।
झारखंड के प्रोफेसर ने परीक्षा प्रणाली पर क्या कहा?
इसी घटनाक्रम के बीच झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डीके सिंह ने AI के दौर में परीक्षा और मूल्यांकन के तरीके पर दोबारा विचार करने की जरूरत बताई है। उनके अनुसार, IIT Bombay AI Cheating जैसी घटनाओं से यह सवाल सामने आता है कि क्या केवल याददाश्त जांचने वाली परीक्षा प्रणाली आज की तकनीकी दुनिया के लिए पर्याप्त है।
प्रोफेसर सिंह का जोर इस बात पर है कि परीक्षाओं में छात्रों की क्रिएटिविटी, क्रिटिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग और प्रैक्टिकल समझ को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी याद कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के लिए तैयार करना भी होना चाहिए।
AI को रोकने के बजाय सही इस्तेमाल पर जोर
IIT Bombay AI Cheating की बहस के बीच AI को केवल नकल के साधन के तौर पर देखना भी पर्याप्त नहीं है। प्रोफेसर डीके सिंह ने AI के सकारात्मक इस्तेमाल की बात कही है। उनके मुताबिक कैंपस में AI का उपयोग देश और समाज के सामने मौजूद समस्याओं के समाधान खोजने में किया जा सकता है।

IIT Bombay AI Cheating मामला यह सवाल जरूर सामने रखता है कि बदलती तकनीक के साथ परीक्षा व्यवस्था भी कितनी तेजी से बदलनी चाहिए। आने वाले समय में मूल्यांकन में रचनात्मकता, समझ और वास्तविक समस्या-समाधान क्षमता को अधिक जगह देने पर बहस और तेज हो सकती है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। IIT Bombay AI Cheating मामले में छात्र की मौत से जुड़े कारणों या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जाना चाहिए। संस्थान और अन्य पक्षों के दावों में अंतर हो सकता है, इसलिए पाठकों को आगे की आधिकारिक जांच और विश्वसनीय रिपोर्टों पर ध्यान देना चाहिए।
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