Social Media Use: सोशल मीडिया जहां लोगों को जोड़ने का दावा करता है, वहीं अब यही प्लेटफॉर्म युवाओं को अकेलेपन की ओर धकेल रहा है। अमेरिका में 18 से 24 वर्ष के कॉलेज छात्रों पर की गई एक बड़ी स्टडी में सामने आया है कि आधे से ज्यादा छात्र loneliness यानी अकेलेपन से जूझ रहे हैं, और इसका सीधा संबंध उनके social media use से है।
सिर्फ 2 घंटे रोज सोशल मीडिया भी बना सकता है अकेला

Journal of American College Health में प्रकाशित इस peer-reviewed study के अनुसार, जो छात्र हफ्ते में करीब 16 घंटे (लगभग 2 घंटे रोज) सोशल मीडिया पर बिताते हैं, उनमें अकेलेपन की संभावना काफी ज्यादा पाई गई। शोध में यह भी सामने आया कि जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर बिताया गया समय बढ़ता है, वैसे-वैसे loneliness का खतरा भी बढ़ता जाता है।
64 हजार छात्रों पर किया गया व्यापक अध्ययन
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली शोधकर्ता Dr. Madelyn Hill ने 120 से अधिक कॉलेजों के 64,988 छात्रों के डेटा का विश्लेषण किया। छात्रों से यह पूछा गया कि वे कितनी बार खुद को अकेला, उपेक्षित या साथ की कमी महसूस करते हैं। परिणाम चौंकाने वाले रहे।
स्टडी के प्रमुख निष्कर्ष
अध्ययन में सामने आए कुछ अहम बिंदु इस प्रकार हैं:
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54% कॉलेज छात्र खुद को अकेला महसूस करते हैं
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महिला और Black students में loneliness की शिकायत ज्यादा पाई गई
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Hybrid courses करने वाले छात्र, पूरी तरह face-to-face पढ़ने वालों से कम अकेले थे
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Fraternity और sorority से जुड़े छात्र सबसे कम lonely पाए गए
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घर से पढ़ने वाले छात्र, campus में रहने वालों की तुलना में ज्यादा अकेले थे
सोशल मीडिया और अकेलेपन का सीधा रिश्ता
स्टडी में यह भी देखा गया कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले छात्र, दूसरों की तुलना में ज्यादा lonely थे:
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16–20 घंटे/सप्ताह: 19% ज्यादा loneliness
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21–25 घंटे/सप्ताह: 23% ज्यादा loneliness
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26–30 घंटे/सप्ताह: 34% ज्यादा loneliness
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30 घंटे से ज्यादा: 38% ज्यादा loneliness
शोधकर्ताओं का कहना है कि excessive social media use अक्सर face-to-face interaction की जगह ले लेता है, जिससे सामाजिक जुड़ाव कमजोर हो जाता है।
क्या सोशल मीडिया वजह है या नतीजा?
Social Media Use स्टडी के लेखक यह भी मानते हैं कि यह पूरी तरह साफ नहीं है कि सोशल मीडिया loneliness की वजह है या lonely लोग ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं। संभव है कि यह दोनों का मिश्रण हो। कुछ छात्रों को ऑनलाइन सपोर्ट भी मिलता है, लेकिन लंबे समय तक डिजिटल दुनिया में रहने से असली रिश्ते कमजोर पड़ सकते हैं।
कॉलेजों के लिए चेतावनी और सलाह
स्टडी की senior author Dr. Ashley L. Merianos का कहना है कि यह शोध एक तरह की चेतावनी है। उनके अनुसार:
“Excessive social media use meaningful relationships की जगह ले रहा है, जो छात्रों के mental health को सुरक्षित रखते हैं।”
Social Media Use शोधकर्ताओं ने कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ को सलाह दी है कि वे छात्रों को:
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सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक करें
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Time limits तय करने के लिए प्रेरित करें
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Campus social events में भागीदारी बढ़ाएं
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Offline friendships को मजबूत करने के अवसर दें
कनेक्टेड दुनिया में बढ़ता अकेलापन

Social Media Use यह अध्ययन साफ संकेत देता है कि तकनीक के दौर में भी इंसानी रिश्तों की अहमियत कम नहीं हुई है। सोशल मीडिया का सीमित और संतुलित इस्तेमाल ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
युवाओं के लिए यह जरूरी है कि वे डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर असली रिश्तों में समय दें, क्योंकि वही loneliness से बचने का सबसे मजबूत सहारा हैं।
Disclaimer: यह लेख अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। यह सामान्य सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी मानसिक स्वास्थ्य समस्या के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।
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