जिंदगी में कई बार मुश्किलें इंसान को तोड़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर दर्द को अपनी ताकत बना लेते हैं। झारखंड के कोडरमा जिले के रहने वाले अंशुमन सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने UPSC Indian Forest Service Examination 2025 में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकती।
आज अंशुमन सिंह की सफलता सिर्फ उनके परिवार के लिए गर्व की बात नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी कहानी उन छात्रों को उम्मीद देती है जो कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
कठिन हालात में भी नहीं छोड़ी पढ़ाई

UPSC IFS Success Story की सबसे भावुक बात यह है कि साल 2019 में अंशुमन के पिता का एक हादसे में निधन हो गया था। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरा सदमा दिया। पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारियां अचानक उनके कंधों पर आ गईं। ऐसे समय में कई लोग अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं, लेकिन अंशुमन ने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया।
उन्होंने नौकरी करते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी। दिनभर काम करने के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था, लेकिन उनका लक्ष्य साफ था। 2024 में वे UPSC की लिखित परीक्षा तक पहुंचे, हालांकि उस बार अंतिम चयन नहीं हो पाया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पूरी मेहनत के साथ दोबारा तैयारी शुरू कर दी।
सफलता के पीछे क्या रही रणनीति?
अंशुमन सिंह ने अपनी तैयारी के दौरान limited resources और multiple revision पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। उनका मानना था कि कम किताबों को बार-बार पढ़ना ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके साथ ही उन्होंने लगातार practice और concept clarity पर फोकस किया।
उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि UPSC परीक्षा के तीनों चरणों के लिए अलग तैयारी करनी पड़ती है। सही strategy और लगातार मेहनत ही इस परीक्षा में सफलता दिला सकती है।
UPSC IFS परीक्षा क्या होती है?
| परीक्षा | जानकारी |
|---|---|
| परीक्षा का नाम | Indian Forest Service (IFS) |
| आयोजित संस्था | UPSC |
| उद्देश्य | वन और पर्यावरण अधिकारियों की नियुक्ति |
| चयन प्रक्रिया | Prelims, Mains और Interview |
| कार्य क्षेत्र | Forest और Wildlife Protection |
यह परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।
मां और परिवार को दिया सफलता का श्रेय
UPSC IFS Success Story में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया। अंशुमन ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, भाई और स्वर्गीय पिता को दिया। उन्होंने बताया कि जब भी वे निराश होते थे, उनकी मां उन्हें हमेशा हिम्मत देती थीं और विश्वास दिलाती थीं कि एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।

- कठिन हालात में भी पढ़ाई जारी रखी
- नौकरी के साथ UPSC की तैयारी की
- Limited resources से पढ़ाई की strategy अपनाई
- लगातार revision और practice पर फोकस किया
- परिवार के समर्थन ने बढ़ाया आत्मविश्वास
आज अंशुमन सिंह की सफलता लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की नई कहानी बन चुकी है। उनकी मेहनत और संघर्ष यह सिखाते हैं कि सपने पूरे करने के लिए हालात नहीं बल्कि हिम्मत मायने रखती है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और साझा की गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। परीक्षा और रैंक से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए UPSC की official notification और results देखें।
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